Thursday, July 19, 2018

अपोलो-11 के 49 साल: राष्ट्रपति निक्सन को यकीन था चांद से एस्ट्राेनॉट नहीं लौटेंगे, शोक संदेश भी तैयार था; 6 दिन बाद सभी लौट आए

अपोलो-11 अमेरिका समेत पूरी दुनिया का चांद पर जाने वाला अब तक इकलौता कामयाब मैन्ड मिशन है। मिशन में तीन एस्ट्रोनॉट्स थे। आर्मस्ट्रॉन्ग मिशन कमांडर, एडविन ऑल्ड्रिन पायलट और माइकल कॉलिंस सहयोगी पायलट थे। ये मिशन नाकाम होने वाला था। 20 जुलाई 1969 को आर्मस्ट्रॉन्ग के साथ ऑल्ड्रिन भी चांद की धरती पर उतरे। कॉलिंस यान में ही थे। आर्मस्ट्रॉन्ग और ऑल्ड्रिन को दोबारा से यान तक पहुंचने में दिक्कत हुई। नासा तक इस गड़बड़ी का संदेश पहुंचा दिया गया। नासा ने इस बात को तुरंत तब राष्ट्रपति रहे रिचर्ड निक्सन तक पहुंचाया। निक्सन एडमिनिस्ट्रेशन को पहले ही अंदेशा था कि तीनों एस्ट्रोनॉट धरती पर वापस नहीं आ पाएंगे। इसके लिए व्हाइट हाउस के स्पीचराइटर बिल सफायर ने 18 जुलाई 1969 को 'इन इवेंट ऑफ मून डिजास्टर' के नाम से शोक संदेश तैयार कर दिया था। हालांकि ये भाषण कभी पढ़ा ही नहीं गया क्योंकि तीनों एस्ट्रोनॉट्स धरती पर वापस आ गए। मिशन को 16 जुलाई को लॉन्च किया गया था और 24 जुलाई 1969 को अपोलो-11 वापस आ गया।

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